यन्त्र-तन्त्र-मन्त्र

यन्त्र-तन्त्र-मन्त्र


अब तक हमने योग, मेस्मरेजिम तथा आत्मिक • विद्या का वर्णन किया। इन विद्याओं का केवल आत्मिक शक्ति तथा उसके उपयोग से ही सम्बन्ध था। अब हम ऐसी बातों का वर्णन करना चाहते हैं जिनका आत्मिक शक्ति से कोई सम्बन्ध न हो परन्तु फिर भी आत्मिक पवित्रता होने की हर तरह आवश्यकता है।

यन्त्र – ताबीज कहो या यन्त्र, बात एक ही है। यह मानी हुई बात है कि समस्त तारे और नक्षत्रों का प्रकृति पर कुछ न कुछ प्रभाव पड़ता है। मनुष्यों की आत्माओं पर भी ताराओं का प्रभाव है। ताराओं की आकर्षण शक्ति में ही मनुष्यों की प्रारब्ध छुपी हुई है। यही कारण है कि ज्योतिषी लोग तुरन्त हिसाब लगाकर मनुष्य के प्रारब्ध के संबन्ध में पूर्व से ही कह देते हैं। और वह बहुदा ठीक निकलती है। इन ताराओं में कोई शुभकारी और कोई अशुभकारी होता है। जब अशुभकारी तारा या गृह के कुफल से मनुष्य को हानि पहुंचती है तब ऐसा मन्त्र कागज या धातु पर लिखकर उस मनुष्य की गर्दन या बांह पर बांध दिया जाता है जिसको कि हानि पहुंची या पहुंचने की सम्भावना है। इन यंत्रों का भी ताराओं और गृहों से सम्बन्ध होता है यही कारण है कि यंत्र आदि यदि मनुष्य पहन ले तो उस पर उसका अवश्य प्रभाव होता है। अब हम यहां कुछ यन्त्रों और ताबीजों का वर्णन करते हैं जिनकी लोगों को विशेष आवश्यकता रहती है।

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