यक्षिणी तंत्र सिद्धि & साधना डिटेल्स

यक्षिणी सिद्धि


यक्षिणी एक देवी का नाम है जिसके सिद्ध करने से मनुष्य सफल मनोरथ होता है। इसमें यदि तनिक ध्यान से देखाजाय तो योग का वही प्रसिद्ध सिद्धान्त मन के निश्चलत्व और आकर्षण का काम करता है। यक्षिणी सिद्धि के साधन से मनुष्य को बहुत लाभ होता है। ब्राह्मणों विद्वानों के द्वारा भी यदि यह साधन कराया जाय तो भी इसकी सिद्धि हो जाती है परन्तु स्वयं साधन में अधिक आनन्द, लाभ और फल होता है। अब हम इसके प्रयोग लिखते हैं ।

यक्षिणी साधन का अभ्यासी परम शुद्ध, विश्वासी सत्यभाषी तथा स्थिरचित्त हो। यह प्रयोग पूरे एक मास का है। इसके अभ्यासी को चाहिये कि आषाढ़ी पूर्णिमा को या श्रावणी प्रतिपदा को किसी निर्जन बन में जाय और एक बेल के वृक्ष के नीचे पवित्र स्थान पर उत्तर की ओर मुख करके प्रतिदिन इतना काम करे कि पहले तो वह रुद्र पाठ करे, फिर 'त्रयम्बक यजा मेह" मन्त्र का पांच हजार बार जप करे। तत्पश्चात् निम्न लिखित मन्त्र से कुबेर जी का १०८ बार पूजन करे। 

यक्षराज नमस्तभ्यं शंकर प्रिय वान्धव एकां मेवशगां नित्यं यक्षिणीं कुरुते नमः फिर रात्रि भरं अनिद्रित रहकर नीचे लिखे मन्त्र का जाप करे: ओं ही ल्लीं ऐं श्री महा यक्षिण्यै सर्वेश्वर्य प्रदात्र्यै नमः । जिस अवधि तक यह प्रयोग हो उस अवधि तक ब्रह्मचर्य रहना परम आवश्यक है। एक महीने के साधन करने से यक्षिणी देवी का आविर्भाव होगा। और सब कार्यों को सफल करेगी तथा धन धान्य और पुत्रों से अभ्यासी को प्रसन्न करेगी

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