शत्रुओं के स्तम्भन का यंत्र

 शत्रुओं के स्तम्भन का यंत्र


शत्रुओं के स्तम्भन का यंत्र, www.tantramantra.in


इस यंत्र को स्वच्छ, लम्बे-चौड़े छिद्ररहित एक भोजपत्र में लिखकर विधिवत् पूजन करे और नीचे लिखे हुए मंत्र का जप करे।


मंत्र

अँन्हल्य लं लं लं लं अमुकस्य मुखं स्तंभय स्तंभय ठः ठः ठः ठः ठः स्वाहा ॥


इस मंत्र को सायंकाल के समय तीन दिन तक १०८ प्रति दिन जपे और विधिवत् पूजन करता रहे। इस यंत्र के प्रभाव से शत्रु की गति, मति, बुद्धि बिल्कुल नष्ट हो जाती है और वह शत्रु ऐसा हो जाता है जैसा मूढ़ और गूंगा और ऐसा मालूम होता है कि उस पर कोई ग्रह लग गया है। जहाँ पर अमुक शब्द का प्रयोग है वहाँ पर साध्य का नाम को बोलना चाहिये।


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