हनुमान सिद्धि साधना | Hanuman siddhi sadhana

हनुमान सिद्धि


यदि समस्त देवी और देवताओं की सिद्धि का ही वर्णन किया जाय तो पूरी एक पुस्तक तैयार हो सकती है। दो एक सिद्धियां पहिले वर्णन कर चुके हैं। अब केवल हनुमान जी की सिद्धि का वर्णन और करते हैं। यदि आपको अन्य सिद्धियां करने की आवश्यकता हो तो आपको किस प्रकार के अनेक ग्रन्थ बाजार में मिल सकते हैं जिनसे आपकी इच्छा पूरी हो सकती है।

सिद्धियां चाहने वालों को यह बात अत्यन्त ध्यान में रखने योग्य है कि वह ब्रह्मचर्य से रहें सत्य भाषण करें, विश्वासी हों तथा स्थिर और दृढ़ चित्र के हों, तथा परिश्रमी हों। इन बातों की सदैव आवश्यकता पड़ती है। अपना शरीर शुद्ध रखें, सांसारिक लोगों में अधिक मिल जुलकर न रहें अन्यथा सांसारिक बातें उनके ऊपर अपना प्रभाव डाले बिना न रहेंगी।

अब हम हनुमान जी की सिद्धि का प्रयोग लिखते हैं। मंगल या शनिवार के दिन नदी तट पर निर्जन तथा नीरव जंगल में शुद्ध पवित्र होकर पहुंचे और एक छोटी सी मूर्त्ति हनुमान जी की स्थापित कर हवन करे और “ओं हनुमान: हनुमन्तः राम भगतः स्वाहा" की दस सहस्र प्रतिदिन आहुति दे और सिंदूर घृत आदि मूर्त्ति पर चढ़ावे । ग्यारह दिन तक इसी प्रकार प्रयोग करे तथा रात्रि को घर आकर भूमि शयन करे ग्यारहवें दिन अभ्यासी को अवश्य ही सिद्ध होगी। परन्तु अभ्यासी को भय न करना चाहिये अन्यथा हानि उठाने का भय है। अतएव इस साधन को बड़ी सावधानी के साथ करने की आवश्यकता है।

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